ब्लैक,व्हाइट और येलो फंगस क्या है || black fungus kya hota hai in hindi

क्या है सफेद फंगस (White Fungus) :-

पूरे देश में महामारी की तरह फैल रहे ब्लैग फंगस के बाद अब व्हाइट यानी सफेद फंगस ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। व्हाइट फंगस को ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है. विशषज्ञों की मानें तो फंगल का ये नया संक्रमण ब्लैक फंगस से बहुत ज्यादा खतरनाक है। व्हाइट फंगस केवल एक अंग नहीं, बल्कि मरीज के फेफड़ों और ब्रेन से लेकर हर अंग पर असर डालता है। विशषज्ञ मानते हैं कि यह फंगल रक्त के जरिए होते हुए शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है। नाखून, स्किन, पेट, किडनी, ब्रेन, प्राइवेट पार्ट और मुंह के साथ फेफड़े भी व्हाइट फंगस से संक्रमित से हो सकते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट के अनुसार यह वायरस की तरह विषाणुजनित हो सकता है। सफेद फंगस की मृत्यु दर वर्तमान में अज्ञात है।



व्हाइट फंगस के लक्षण:-

व्हाइट फंगस से संक्रमित मरीजों में लंग्स पर असर होने के कारण उसके कोविड जैसे लक्षण दिखे, लेकिन उनकी जांच नेगेटिव आई। मरीजों की सांस फूलना या कई बार सीने में दर्द, इस तरह के लक्षण भी हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में शरीर के जॉइंट्स पर असर करने से उनमें दर्द होने लगता है। ब्रेन तक पहुंचने पर सोचने विचारने की क्षमता पर असर दिखता है। बोलने में भी दिक्कत होने लगती है। व्हाइट फंगस के कारण सिर में तेज दर्द के साथ उल्टियां हो सकती हैं।


फंगस संक्रमण का पता कैसे चले?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार फंगल संक्रमण का पता लगाने के लिए एचआरसीटी स्कैन की आवश्यकता हो सकती है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है या मधुमेह से पीड़ित, एड्स के मरीज या जिन लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है, उनमें इस बीमारी की आशंका ज्यादा होती है।



व्हाइट फंगस से मौत हो सकती है ?

डॉ मुंजाल के अनुसार व्हाइट फंगस से मृत्यु का खतरा बहुत कम है जबकि ब्लैक फंगल के मामले में 20 से 80 प्रतिशत मृत्युदर दर्ज की गई है। जहां तक व्हाइट फंगस की बात है तो इस बात की संभावना बहुत कम है कि यह संक्रमण खून तक पहुंचे। यह तभी हो सकता है जब संक्रमित व्यक्ति को पहले से ही कोई घातक बीमारी हो या फिर वह वेंटिलेटर आदि पर हो। इसके अलावा ज्यादा स्टेरॉयड लेने वालों के लिए भी यह घातक हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह तेजी से नहीं फैलता इसलिए इसका इलाज करना सरल है।


सबसे ज्यादा खतरा किन लोगों को?

वैसे तो यह किसी को भी हो सकता है लेकिन नवजात शिशु में इसके होने का जोखिम ज्यादा है। यह बच्चों में दूध की निप्पल और डायपर के गीलेपन की वजह से ज्यादा होता है। हमें इसपर ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह आइसोलेशन के कारण उन बुजुर्ग लोगों में भी देखा गया है जो साफ सफाई का ख्याल नहीं रखते और समय पर कपड़े आदि नहीं बदलते। डायबिटीज और कैंसर के मरीजों को भी यह जल्दी अपनी गिरफ्त में लेता है।


किस तरह के लक्षणों पर गौर करना चाहिए?

यह फंगस तंग और नम जगहों पर तेजी से फैलता है इसलिए यह जरूरी है कि अपने आसपास नियमित सफाई रखें, रोजाना स्नान करें, कपड़े बदलें। धूप का और ताजे भोजन का सेवन करें। व्हाइट फंगस के लक्षणों और पहचान के बारे में डॉ मुंजाल ने कहा कि व्हाइट फंगस के संक्रमण में शरीर पर, जीभ पर या मुंह में सफेद चकते पड़ जाते हैं। हमें समय-समय पर इसका निरीक्षण करते रहना चाहिए। अगर कुछ भी ऐसा दिखाई पड़ता है तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अपनी मर्जी से दवा आदि नहीं लेनी चाहिए।


जानिये, ब्लैक फंगस क्या है?

आपको ब्लैक फंगस के बारे में भी बताते हैं। पहले म्यूकोर्मिकोसिस यानी ब्लैक फंगस आमतौर पर मधुमेह मेलिटस से पीड़ित लोगों में पाया जाता था। यह एक ऐसी स्थिति है जहां किसी के रक्त शर्करा (ग्लूकोज) का स्तर असामान्य रूप से बहुत अधिक होता है। लेकिन कोविड के कारण यह बहुत तेजी से पैर फैला रहा है। जिन मरीजों की रोग - प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से काम नहीं करती है, उनमें म्यूकोर्मिकोसिस होने की संभावना अधिक होती है। चूंकि कोविड – 19 का इलाज प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज को दबाने के लिए जाना जाता है, इसलिए रोगियों को ब्लैक फंगस के संक्रमण से ग्रसित होने के जोखिम अधिक होता है।





यह संक्रमण तब होता है जब कवक बीजाणुओं को सांस के जरिए शरीर के भीतर लिया जाता है। यह नाक, आंख/आंख के सॉकेट की कक्षा, मौखिक गुहा को संक्रमित करता है और यहां तक ​कि मस्तिष्क तक भी फैल सकता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, नाक बंद होना, नाक से पानी निकलना (हरा रंग), साइनस में दर्द, नाक से खून बहना, चेहरे पर सूजन, चेहरे पर उद्दीपन में कमी और त्वचा के रंग में कमी आना शामिल है।


 येलो फंगस (Yellow Fungus) क्या है ?

 कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच येलो फंगस का पहला मामला दिल्ली से सटे गाजियाबाद में देखने को मिला है. येलो फंगस अभी तक मरीजों मे मिले ब्‍लैक और व्‍हाइट फंगस से ज्‍यादा खतरनाक बताया जा रहा है. बता दें कि गाजियाबाद के जिस मरीज में येलो फंगस पाया गया है, उसकी उम्र 34 साल है और वह कोरोना से संक्रमित रह चुका है. इसके साथ ही वह डाइबिटीज से भी पीड़ित है.



येलो फंगस क्या हैं इसके लक्षण ?

येलो फंगस एक घातक बीमारी है क्योंकि यह आंतरिक रूप से शुरू होती है और इसलिए यह महत्वपूर्ण है अगर आपको कोई भी लक्षण दिखें तो उपचार शुरू कर दें. येलो फंगस के प्रमुख लक्षणों में ये हैं…..सुस्ती महसूस होना,भूख कम लगना या बिल्कुल भी न लगना,शरीर का वजन कम होना

अगर इस दौरान किसी को घाव है तो उसमें से मवाद का रिसाव होने लगता है और घाव बहुत धीमी गति से ठीक होता है,कई लोगों को आंखों में इंफेक्शन को सकता है,इस दौरान,मरीज की आंखें धंस जाती है,ऑर्गन डैमेज तक हो सकते हैं,


येलो फंगस होने का कारण

हाइजीन मेनटेन न करना फंगस का सबसे बड़ा कारण हो सकता है. इसलिए खुद को साफ सुथरा रखने के साथ ही, घर की सफाई भी करें. हमारे आसपास अधिक गंदगी का होना ही येलो फंगस का मुख्य कारण हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि अपने घर के आसपास सफाई रखें, जिससे बैक्टीरिया या फंगस डेवलप न होने पाएं. घर पर मौजूद पुरानी खाने की चीजों हटा दें, जिसमें फंगस लगने का खतरा हो.


येलो फंगस से बचाव :-

येलो फंगस के कोई लक्षण दिखे तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से कंसल्ट करें. जरूरत पर उपचार लें. माना जा रहा है कि ह्यूमिडिटी फंगस पैदा करने में काफी महत्वपूर्ण है. घर में ज्यादा ह्यूमिडिटी बैक्टीरिया और फंगस के विकास को बढ़ावा दे सकती है. इसलिए हवादार जगह रहने की कोशिश करें. इम्यूनिटी को मजबूत रखने का उपाय करें, अगर आपकी इम्यूनिटी अच्छी होगी तो इस फंगस से बचा जा सकता है.

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